दिन में चराती थी बकरी, रात को टॉर्च की रौशनी में पढ़ती थी, राजस्थान की लाड़ली ने किया जिले का नाम रोशन

एक पुरानी कहावत है कि प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती और अगर सच्चे लगन से मेहनत की जाए तो सारे सपने साकार हो जाते है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है राजस्थान के अलवर जिले की रहने वाली बिटिया रवीना ने। रवीना इसी साल बारहवीं में 93% अंक लाकर उतीर्ण हुई है। रवीना कला संकाय की छात्रा थी और उसकी यह सफलता इसलिए भी ज्यादा मायने रखती है क्युकी वह बारहवी में बिना किसी कोचिंग सेंटर के पढ़ाई करती थी। रवीना के इस सफलता पर पूरे गांव वाले बेहद उत्साहित है लेकिन रवीना ने जिस संघर्ष को पार करके अपनी पढ़ाई पूरी की है उसको जान कर आप हैरान रह जाएंगे। आइए आपको बताते है कैसे बकरिया चराने वाली लडकी ने पूरे जिले का नाम रोशन कर दिया।

दिन में चराती थी बकरी, रात के अंधेरे में मोबाइल से करती थी पढ़ाई

दिन में चराती थी बकरी, रात को टॉर्च की रौशनी में पढ़ती थी, राजस्थान की लाड़ली ने किया जिले का नाम रोशन

राजस्थान के अलवर जिले में रात के अंधेरे में भी एक घर आज जगमगा रहा है क्युकी इस घर की बिटिया ने पूरे जिले में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। हम बात कर रहे रवीना की जिसने तमाम संघर्षों के बावजूद भी अपनी पढ़ाई जारी रखी। रवीना के पास संसाधनों की कमी थी क्युकी उसके घर में कोई भी कमाने वाला नही था इस वजह से रवीना के घर में बिजली की व्यवस्था नहीं थी लेकिन रवीना ने इससे हार नही मानी बल्कि इसे अपनी मजबूती बनाया और मोबाइल के टॉर्च से पढ़ कर उसने 12वी में 93% अंक लाए। रवीना के घर में गरीबी का यह आलम है कि उसे मिलने वाली स्कॉलरशिप से ही उसके घर की रोजी रोटी चलती हैं। रवीना गुर्जर के पिता रमेश गुर्जर का 12 साल पहले ही एक हादसे की वजह से निधन हो गया था और रवीना अपने दादी और 4 अन्य भाई बहनों के साथ गुजर बसर करती थीं।

रात को मोबाइल से 3 घंटे करती थी पढ़ाई, बनना चाहती है पुलिस

राजस्थान के अलवर जिला में रहने वाली रवीना के कहानी को सुनकर आप भी उसके जज्बे को सलाम करेंगे। रवीना दिन में जहां बकरियां चराती थी वहीं रात होते ही वह अपना मोबाइल का टॉर्च लेकर पढ़ने के लिए बैठ जाती थी। रवीना ने बताया कि प्रत्येक रात को 9:00 बजे से लेकर 12:00 बजे रात तक पढ़ाई करती थी। रवीना ने बताया कि वह आगे चलकर पुलिस में भर्ती होना चाहती है और देश की सेवा करना चाहती है। रवीना के पास जो मोबाइल है वह छात्र स्कॉलरशिप योजना के अंतर्गत मिला है जिससे वह दिन रात पढ़ाई करती है। उसके इस सफलता पर पूरे गांव में उल्लास का माहौल है वही उसकी मां जिन्हें दिल की बीमारी है वह भी अपनी बेटी की सफलता से गदगद है और फूले नहीं समा रही है। रवीना अपने ही गांव के सरकारी कॉलेज से पढ़ाई कर रही थी और वह आगे भी अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहती हैं। रवीना ने अपना आदर्श भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद को बताया है जो सड़को की रोशनी में पढ़ाई किया करते थे।

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About Shubham Tiwari

Shubham Tiwari is the Founder and editor of Gyan Sankhya. Having more than 5+ years of experience in Bollywood News writing covering all the biggest happenings of The B-Town.